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पड़ोसन लड़की की चुत की कुंवारे लंड से चुदाई

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मैडम की चुत चुदाई की तलब


सैक्सी टीचर Xxx चुदाई कहानी एक स्कूल टीचर की है. हम दोनों क्लास में जाते थी. मैं उससे दोस्ती करना चाहता था पर वो भाव नहीं देती थी. तो बात कैसे बनी?

मेरी क्लास में एक स्कूल टीचर से दोस्ती हुई और हमने दोस्ती मैं कैसे सारी हदें पार कर दीं … मेरी इस सैक्सी टीचर Xxx चुदाई कहानी में आप पढ़ें.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम ऋतुराज है. मैं गाजियाबाद में रहता हूँ. मेरी उम्र 31 साल है … मैं दिखने में ठीक-ठाक सा एक साधारण इंसान हूँ. ये मेरी अपनी आप बीती है.

ये बात आज से 4 साल पहले उस समय की है, जब मैं MBA करने के बाद इकोनॉमिक्स से MA करने का सोच रहा था.
मैंने डिस्टेंस लर्निंग वाले एक कॉलेज में एडमिशन ले लिया. वहां मेरी हर संडे को क्लास होती थी.

मेरी क्लास में एक लेडी भी आती थी, जिसकी उम्र लगभग 40 के आस-पास रही होगी. वो किसी स्कूल में टीचर थीं. उनका नाम रमा था.

उनके हस्बैंड ज्यादातर बाहर रहते थे. ये बात मुझे उनसे दोस्ती होने के बाद पता चली थी.

जब मैंने उन्हें पहली बार देखा था तो कसम से देखता ही रह गया था.
मुझे रमा मैडम को देख कर ऐसा लगा मानो स्वर्ग से कोई अप्सरा ज़मीन पर आ गई हो.
उनका रंग दूध जैसा सफ़ेद, बिल्कुल सोनाली बेंद्रे सी छवि मेरी आंखों में उतर आई.

मैं क्या …. कोई भी उन्हें देखे, तो बस देखता ही रह जाए.

वैसे तो हमारी क्लास में ज्यादा लोग नहीं थे … पर फिर भी वो किसी से बात नहीं करती थीं.
उनके चेहरे पर हमेशा बस एक सादगी सी छाई रहती थी.

मेरा दिमाग ब्लैक बोर्ड पर कम और उनकी तरफ ज्यादा होता था. उन्हें देखने की वजह से मैं पीछे बैठने लगा था.
मैं उनसे बहाने से बात करने की बहुत कोशिश करता था पर वो बात ही नहीं करती थीं.

एक रविवार हम सब क्लास में बैठ कर पढ़ रहे थे कि अचानक बहुत तेज़ बारिश होने लगी.

क्लास खत्म होने तक भी बारिश बंद नहीं हुई. बारिश कुछ हल्की हुई … तो कुछ लोग निकल गए.

क्योंकि मैं बाइक से आया था तो मैं बारिश और हल्की होने का इन्तजार करने लगा या ये कहो मेरे मन में चोर आ गया था.

कुछ देर में लगभग सब लोग चले गए थे. मुझे यही मौका ठीक लगा और मैंने उनके पास जाकर कहा- क्या मैं आपको कहीं छोड़ दूँ?

उन्होंने मेरी तरफ ज़रा गुस्से में देखा … फिर शांत होते हुए कहा- आप चले जाओ … मैं चली जाऊंगी.

ऐसे सड़ू से व्यवहार पर गुस्सा तो मुझे भी आया और मैं वहां से जाने ही लगा था … तभी मेरे घर से फ़ोन आ गया और मैं रुक कर फोन से बात करने लगा.

इतने में रमा मैडम वहां से बाहर जाने को निकलीं.
फर्श चिकना और गीला होने के कारण उनका पैर फिसल गया और वो गिर गईं.

मैं फ़ोन काट कर उनके पास गया और उन्हें उठाने लगा पर वो उठ नहीं पा रही थीं.
मैंने उन्हें सहारा देकर गोद में उठाया और साइड में बिठा दिया.

फिर उन्हें किसी तरह बाइक पर बिठा कर उनके घर छोड़ दिया.

उन्होंने लंगड़ाते हुए दरवाजे का सहारा लिया और मुझे अन्दर आने को कहा.
मेरे मना करने पर वो जिद करने लगीं.

मैं घर के अन्दर गया तो वो किसी तरह से चाय बनाने चली गईं.
अब उनकी चाल काफी ठीक हो चुकी थी.

चाय पीकर मैं वहां से चला गया.

इस बीच उनके ‘धन्यवाद …’ कहने और मेरे ‘अरे ये तो मेरा फर्ज था …’ के अलावा और कुछ बात नहीं हुई.

इस घटना से इतना जरूर हुआ कि रमा मैडम का व्यवहार मेरे प्रति दोस्ताना हो गया था.
इससे मेरा काम बन गया था.

उस दिन से हमारी बातचीत होना शुरू हो गई. अब मुझे हर संडे का इन्तजार रहने लगा.

धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे, साथ में मूवी देखने जाने लगे और घूमने-फिरने के साथ-साथ हर तरह की बातें भी होने लगीं.

अब मुझे इंतज़ार उस पल का था … जब हमारा मिलन होना था.

एक दिन उन्होंने मुझे अपने घर पर ये कह कर बुलाया कि आज उनका जन्मदिन है.

मैं भी अच्छे से तैयार होकर चल दिया.
रास्ते से मैंने एक कलाई पर बांधने वाली घड़ी ले ली जो उन्हें गिफ्ट में देनी थी.

मैं उनके घर पहुंचा.
उन्होंने दरवाजा खोला और अन्दर आने को कहा. उन्होंने बैंगनी रंग की साड़ी पहन रखी थी और बला की खूबसूरत लग रही थीं.
उन्हें पता था कि मेरा फेवरेट रंग जामुनी है.

जैसे ही मैं अन्दर गया तो चौंक गया क्योंकि अन्दर कोई भी नहीं था.

मैंने पूछा- पार्टी कहां पर है?
उन्होंने मुस्कुरा कर कहा- यहीं तो है.

मैंने कहा- पर यहां तो कोई भी नहीं है.
तो उन्होंने कहा- क्या हम दोनों काफी नहीं हैं!

उनकी इस बात से मुझे हरी झंडी की झलक सी मिल गई थी पर अभी भी मुझे संयम बरतना जरूरी लगा.

हम दोनों बस एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे.
उनकी इन निगाहों ने मुझे अस्सी प्रतिशत तक पक्का कर कर दिया था कि ये हुस्न की परी आज मेरे लौड़े के नीचे होगी.

फिर हम दोनों धीरे धीरे पास आने लगे. मेरे बहुत करीब आकर उन्होंने अपने सर को झुका लिया.
मैंने अपनी उंगली उनकी ठोड़ी पर लगा कर उनका चेहरा ऊपर किया तो उनकी आंखें बंद थीं पर मुझसे और इन्तजार नहीं हो रहा था.

मैंने बाक़ी बीस प्रतिशत को भी समेट लिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए.
उनका साथ मिला, तो मैं सौ में से सौ अंक पा चुका था.

अब हमें दुनिया का कोई होश नहीं था. हम बस एक दूसरे के शरीर पर हाथ फेरते रहे और किस करते रहे.
हमें पता ही नहीं चला कि कब आधा घंटा बीत गया.

जब होश आया तो हम अलग हुए.
अब तक उनका ब्लाउज और ब्रा मैं पीछे से खोल चुका था और वो मेरी शर्ट के बटन खोल चुकी थीं.

अलग होने पर हम दोनों ने एक दूसरे नंगे सीनों को देखा, तो वो थोड़ी शर्मा गईं और मुझे बेडरूम में आने को इशारा कर दिया.

मैंने रमा जी के बेडरूम में जाकर देखा तो देखता ही रह गया.
उन्होंने सारी सजावट ऐसे कर रखी थी … जैसे हम फिल्मों में देखते हैं. कमरे में कम से कम 20 मोटी मोटी मोमबत्तियां जल रही थीं … पूरा कमरा सुगंध से महक रहा था … बिस्तर पर गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां बिछी थीं.

अब मुझसे बिलकुल रहा नहीं जा रहा था.
मैंने उन्हें अपने पास खींचा और बेड पर पटक दिया. एक ही झटके में उनके शरीर पर लटकी हुई ब्रा और ब्लाउज को अलग कर दिया.

मैं उनके बड़े चूचों को दबाने लगा.

उन्होंने अपने हाथ से एक स्तन मेरे मुँह में देने की कोशिश की तो मैंने उनकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और निप्पल खींचते हुए चूची को अपने होंठों से मींज दिया.

उनकी मादक आह निकल गई और उनके एक हाथ ने मेरे सर को अपने उस दूध पर दबा लिया.

रमा मैडम की चूचियों का मर्दन और रसपान मेरे मुँह से होने लगा. वो भी मुझे कभी एक चूसने को दे देतीं, तो कभी दूसरी चूची चुसवाने लगतीं.

करीब 10 मिनट यही चलता रहा.



इस बीच रमा मैडम बस मादक आहें भरती रहीं.

न सब के बीच में पता नहीं कब मेरा हाथ रमा की साड़ी में चला गया और मैं पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर हाथ फेरने लगा.
उनकी पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी.

उनकी पैंटी उतारने लगा ही था कि मैं उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर रुकने को कहा और बेड से उठ कर जाने लगीं.
मैं ये सोच कर डर गया कि कहीं रमा को मेरी कोई बात गलत तो नहीं लगी.

इससे पहले कि मैं उनसे कुछ पूछता, उससे पहले उन्होंने कमरे की लाइट्स ऑफ कर कर दीं.
वो वासना भरी आवाज में बोलीं- अगर लाइट जलती रही … तो मेरी सारी मेहनत ख़राब हो जाएगी, जो मैंने कमरा सजाने में की है.

लाइट बंद होने के बाद तो सच में ऐसा लग रहा था कि जैसे तारे ज़मीन पर आ गए हों.

अब उन्होंने अपनी अस्त-व्यस्त हो चुकी साड़ी को उतार कर एक तरफ रख दिया और गीली पैंटी पहने हुए ही मेरे ऊपर आ गईं.

मैं कमर के बल बिस्तर पर लेटा था … मुझे लगा अब वो मेरी पैंट उतार कर मेरा लंड चूसना चाहेंगी.

पर वो धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहीं और अपनी झांट रहित चूत को मेरे मुँह पर रख कर बैठ गईं.

पहले तो मुझे थोड़ा अजीब सा लगा पर जैसे ही मैंने सांस ली … तो उनकी चूत के पानी की खुशबू ने मुझे पागल कर दिया.
मैंने पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.

उन्होंने भी अपनी गांड से पैंटी नीचे सरकाई और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी चूत को मेरे होंठों पर रगड़ने लगीं.

रमा मैडम जोर जोर से आहें भर रही थीं- आ आह्ह आ आह्ह ओह्ह आआह्ह … और चूसो … आह मैं बहुत प्यासी हूँ.
करीब 5 मिनट बाद वो झड़ गईं और मेरे ऊपर लेट गईं.

थोड़ी देर इंतज़ार के बाद हम दोनों से फिर किस करने लगे.

अब उन्होंने मेरी पैंट उतार दी और लंड को सहलाने लगीं.
मैं पागल सा हुआ जा रहा था क्योंकि मेरा लंड फटने को तैयार था.

मुझे सेक्सी टीचर की ये Xxx अठखेलियां बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थीं. मैंने उन्हें पकड़ कर घुमा दिया. अगले ही पल वो मेरे नीचे और मैं उनके ऊपर था.

मैंने जल्दी से अपनी पैंट और अंडरवियर एक साथ उतार दिया और उनकी गांड से नीचे को सरकी हुई पैंटी को एक झटके में निकाल फैंका.

वो कुछ समझ पातीं कि मैंने बिजली की गति से अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रख कर एक जोरदार धक्का दे दिया.
उनकी चूत बहुत गीली थी, इसीलिए आधे से ज्यादा लंड चुत के अन्दर घुसता चला गया था.

रमा- आह मर गई … धीरे!

मैंने उनकी आह को दरकिनार करते हुए फिर से एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया और हम दोनों की जांघें आपस में मिल गईं.
ये सब इतना जल्दी हुआ था कि रमा मैडम की चीख भी ठीक से नहीं निकल पाई.

अब उन्होंने मुझे अपनी बांहों के घेरे मैं जोर से कस लिया.
उनके होंठ मेरे होंठों से, सीना सीने से और जांघें जांघों से मिली हुई थीं. मेरा लंड उसकी चूत में पिस्टन की तरह खुदाई कर रहा था.

ये सब इतनी जल्दी हो रहा था कि दस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद ही मेरा रस छूट गया और मेरा माल रमा मैडम की बच्चेदानी में भर गया.
वो भी स्खलित हो चुकी थीं.

अब हम दोनों की ही सांसें बहुत तेजी से फूल पिचक रही थीं.
मैं उनके ऊपर ही लेट गया.

थोड़ी देर बाद जब सब नार्मल हुआ तो रमा मैडम ने मुझसे कहा- मुझे ऐसा अनुभव पहली बार हुआ है … जब मैं एक ही समय में बार बार झड़ी हूँ.
मैंने उनसे कहा- अब से इस तरह के अनुभव की आदत डाल लो!

फिर उन्होंने मुझे बताया- मैं भी तुम्हें शुरू से ही पसंद करती थी पर ये बात बताने की मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई.

थोड़ी देर बात करने के बाद मेरे लंड में फिर से जान आने लगी.
अब मैंने इशारे से उन्हें लंड चूसने को बोला तो उन्होंने मेरा लंड चूसना चालू कर दिया.
उनमें लंड चूसने की भी एक अलग कला थी.

मुझे उस वक़्त इतना मज़ा आ रहा था कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता.
बस इतना पता था कि मुझे आज से पहले इतना मज़ा कभी नहीं आया था.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा तो मैंने उनसे कहा कि मेरा होने वाला है.
पर उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर दिया और लंड चूसना जारी रखा.
शायद वो मेरे माल का स्वाद चखना चाह रही थीं.

और हुआ भी यही, वो मेरा सारा माल पी गईं.
मैं तो जैसे आज स्वर्ग की सैर पर निकला था.

आज मैं घर जाना ही नहीं चाहता था.
जब मैंने ये बात उन्हें बताई तो उन्होंने कहा कि मैं भी तुम्हें आज घर नहीं जाने देना चाहती हूँ.

उनके मुँह से इतना सुन कर मैंने घर पर फ़ोन करके बोल दिया कि आज रात मैं अपने दोस्त के यहां रुक रहा हूँ. सुबह वापस आऊंगा.

फिर मैंने उनसे कहा- मुझे भूख लगी है.
उन्होंने बाहर से खाना आर्डर कर दिया.

खाना खाकर हम वापस बेडरूम में आ गए.

दोस्तो, मुझे डॉगी स्टाइल में चुदाई करना बहुत पसंद है.
मैं ये बात उनसे कहने ही वाला था कि उन्होंने मुझसे कहा कि अब मुझे ऑन द टॉप आना है.

जैसे उन्होंने पहले मेरा मुँह चोदा था, अब वैसे ही मेरे लंड चुदने की बारी थी.

इस बार उन्होंने मेरे लंड पर पहले एक क्रीम से मालिश की जिससे मेरे लंड पर कुछ ज्यादा ही चमक आ गई.
फिर सेक्सी टीचर सीधा मेरे लंड पर आकर बैठ गईं और मुझे चोदने लगीं.

आपने कभी किसी हलवाई को जलेबी बनाते तो जरूर ही देखा होगा, ऐसी ही वो मेरे लंड पर गोल गोल घूम कर कुछ जलेबी सी बना रही थीं. जो भी हो … मुझे चुत चोदने में मज़ा बहुत आ रहा था. मैं उन्हें बांहों में भर कर किस करना चाह रहा था, पर वो तो चुदाई में ऐसे मस्त थीं कि जैसे किसी घोड़े पर सवार हों. पूरा कमरा उनकी आहों से गूंज रहा था.

दोस्तों, यहां मैं आपको एक बात बता दूँ कि मैं उनकी … और वो मेरी बहुत इज्जत करते हैं इसीलिए हमारे बीच किसी तरह की गाली-गलौच नहीं हुई.

लगभग 8-10 मिनट बाद जब वो फिर से झड़ गईं तो मेरे ऊपर गिर गईं.
पर मेरा शेर तो अब भी दहाड़ रहा था.

मैंने पहले तो उनको थोड़ा समय दिया, फिर उनसे घोड़ी बनने के लिए कहा.
वो मेरी बात मान कर घोड़ी बन गईं.

अब उन पर सवार होने की बारी मेरी थी.
उनके बेड का गद्दा 10 इंच मोटा था, उस पर उन्हें घोड़ी बना कर चढ़ने में जो मज़ा आया … आह क्या बताऊं दोस्तों … फुल मस्ती हुई.

इस बार रमा मैडम पहले से भी ज्यादा उतेज्जित लग रही थीं और जोर-जोर से चिल्ला रही थीं.
मेरा लंड उनकी बच्चेदानी पर टक्कर मार रहा था, शायद इसीलिए उनका ये हाल हो रहा था.

फिर बीस मिनट तक रमा मैडम की चुत का बाजा बजाने के बाद जैसे ही मुझे लगा कि मेरा होने वाला है, मैं अपनी पूरी ताक़त से उन्हें चोदने लगा.

दसेक झटकों के बाद एक बार फिर मैंने उनकी रसीली चूत को और रसदार बना दिया.

उस दिन के बाद से चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया और और सालों साल चला.

दोस्तो, आज की ये टीचर Xxx कहानी यहीं समाप्त होती है पर जल्द ही पुन: हाज़िर होऊंगा.
अगली बार रमा मैडम की चुत चुदाई की तलब के अगले भाग को लिखूंगा.

दोस्तो, आपको मेरी सैक्सी टीचर Xxx चुदाई कहानी कितनी पसंद आई, ये मुझे मेल पर लिखना न भूलें.
rituraaj140988@gmail.com


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